२० अगस्त १९४५ को जापानी कर्नल टाडा ने श्री एस. ए. अय्यर को नेताजी की
मृत्यु की सूचना दी | श्री अय्यर ने आग्रह किया कि उन्हें तुरंत तइपेई
पहुंचा दे | कर्नल टाडा उन्हें विमान से ले गए किन्तु तइपेई नहीं, वल्कि एक
अन्य नगर ताईचू | अय्यर ने पूछा – क्या यह ताइहोकू है ? जबाब मिला- नहीं,
ताइचू है | अय्यर चिल्लाये – ऐसा क्यों????? नहीं नहीं, वे मरे नहीं है,
अवश्य जीवित है | यह मनगढ़ंत कहानी है | देखिये कर्नल मै साफ कहता
हूँ………………. (एस. ए. अय्यर, अन्टू हिम ए विटनेस, पेज ८५-८६)
आखिर अय्यर को नेताजी का शव दिखाने तइपेई क्यों नहीं ले जाया गया ?
क्योकि वहां विमान दुर्घटना और नेताजी के शव के नाम पर कुछ था ही नहीं |
आखिर अय्यर को नेताजी का शव दिखाने तइपेई क्यों नहीं ले जाया गया ?
क्योकि वहां विमान दुर्घटना और नेताजी के शव के नाम पर कुछ था ही नहीं |
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