नेताजी की मृत्यु के संबंध में सरकार का दृष्टिकोण क्या रहा है?
मुखर्जी आयोग ने अपने काम को बखूबी अंजाम दिया और जाँच के पाँच प्रमुख बिन्दुओं पर 8 नवम्बर, 2005 को पेश अपनी रिपोर्ट में निम्नानुसार ठोस निष्कर्ष दिए:(क) क्या सुभाष चन्द्र बोस की मृत्यु हो चुकी है या वे जीवित हैं?
मुखर्जी आयोग – नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की मृत्यु हो गई है।
(ख) यदि उनकी मृत्यु हो चुकी है तो क्या उनकी मृत्यु जैसा कि कहा गया है हवाई दुर्घटना में हुई थी?
मुखर्जी आयोग – उनकी मृत्यु वायुयान दुर्घटना में नहीं हुई, जैसा कि बताया जाता है।
(ग) क्या जापानी मंदिर में जो अस्थियाँ रखी हैं वे नेताजी की अस्थियाँ हैं?
मुखर्जी आयोग – जापानी मन्दिर में रखे अवशेष नेताजी के नहीं हैं।
(घ) क्या उनकी मृत्यु किसी अन्य स्थान पर किसी अन्य ढंग से हुई है और यदि हाँ तो कब और कैसे?
मुखर्जी आयोग – किसी निश्चित साक्ष्य के अभाव में कोई सकारात्मक उत्तर नहीं दिया जा सकता।
(ङ) यदि वे जीवित हैं तो उनके पते-ठिकाने के संबंध में…
मुखर्जी आयोग – उत्तर (क) में पहले ही दिया जा चुका है।
लेकिन भारत सरकार संसद में प्रस्तुत अपनी कार्रवाई रिपोर्ट (ATR) में मुखर्जी आयोग के इस निष्कर्ष से सहमत नहीं हुई कि नेताजी की मौत 18 अगस्त, 1945 को कथित वायुयान दुर्घटना में नहीं हुई थी और जापान के रेन्कोजी मंदिर में रखी अस्थियाँ नेताजी की नहीं हैं। संसद में इस बारे में हुए वाद-विवाद के दौरान गृह मंत्री शिवराज पाटिल ने सरकार की तरफ से यह सफाई दी कि इस मामले पर पूर्ववर्ती शाह नवाज खान जाँच समिति तथा जी. डी. खोसला आयोग के निष्कर्षों को सरकार अधिक विश्वसनीय मानती है।
जबकि इसके ठीक विपरीत 28 अगस्त, 1978 को लोक सभा में तत्कालीन प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई ने उन दो पूर्ववर्ती जाँचों के निष्कर्षों के संबंध में निम्न वक्तव्य दिया था: – 18 अगस्त 1945 को मंचूरिया की हवाई यात्रा के दौरान तैहोकु हवाई अड्डे पर हवाई दुर्घटना में नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की मृत्यु की रिपोर्ट के बारे में दो बार जांच की गई है जिनमें से एक मेजर जनरल शाह नवाज खां की अध्यक्षता में एक समिति द्वारा की गई थी और दूसरी पंजाब उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश श्री जी.डी. खोसला की अध्यक्षता में एक सदस्यीय जाँच समिति द्वारा की गई थी। पहली समिति ने बहुमत से और श्री खोसला ने उनकी मृत्यु संबंधी रिपोर्ट को सच माना था। उसके बाद से इन दो रिपोर्टों में पहुंचे निष्कर्षों की सच्चाई को लेकर उचित शंकाएँ प्रस्तुत की गई हैं तथा साक्षियों की गवाही में अनेक महत्वपूर्ण असंगतियाँ देखी गई हैं |
इस संबंध में 2 फरवरी, 2007 को कोलकाता उच्च न्यायालय ने मुखर्जी आयोग के मुख्य निष्कर्षों को खारिज करने वाली केन्द्र सरकार की कार्रवाई रिपोर्ट को रद्द किए जाने की मांग करते हुए दायर एक जनहित याचिका को सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया है।
यह प्रश्न विचारणीय है कि नेताजी की मृत्यु के संबंध में सरकार का दृष्टिकोण क्या रहा है? वर्ष 1997 में कोलकाता उच्च न्यायालय में इस मामले को अंतिम रूप से निपटाए जाने के लिए एक जनहित याचिका दायर की गई थी। मामले की सुनवाई के दौरान भारत सरकार की तरफ से पेश वकील ने विगत वर्षों में सरकार के पास मौजूद गोपनीय सूचनाओं के आधार पर जो बातें अदालत को बताईं उसी को ध्यान में रखते हुए अदालत ने अप्रैल 1998 में सरकार को इस मामले की जाँच के लिए एक नया आयोग गठित करने का आदेश दिया। अदालत के उस आदेश में सरकार के वकील के इस बयान का उल्लेख इस प्रकार किया गया है: –
“अत: अब जांच आयोग अधिनियम 1952 (1952 का 60) के खण्ड 3 के उपखंड (1) और (2) के द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए केन्द्रीय सरकार एतद्द्वारा भारत के सर्वोच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति श्री एम.के. मुखर्जी सहित एक जांच आयोग का गठन करती है।”
इस अधिसूचना से साफ जाहिर है कि सरकार के पास नेताजी की मृत्यु के बारे में कोई असंदिग्ध जानकारी नहीं थी और इसीलिए उसका यह मत था कि आयोग का गठन किया जाना जरूरी था, जिसके लिए कोलकाता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश प्रभाशंकर मिश्रा ने आदेश दिया था। उक्त अधिसूचना में उच्चतम न्यायालय के अवकाश प्राप्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति मनोज कुमार मुखर्जी की अध्यक्षता में गठित नए आयोग को जाँच के लिए दिए गए प्रश्नों से भी यह साफ जाहिर होता है कि सरकार के पास नेताजी की मृत्यु के संबंध में कोई निश्चयात्मक सूचना नहीं थी। यदि उसके पास ऐसी ठोस सूचना रही होती तो उसने आयोग द्वारा जाँच किए जाने हेतु इस तरह के प्रश्न तैयार नहीं किए होते |

*भारतीय सुभाष सेना*
ReplyDelete*भारतीय सुभाष सेना*
!!भारत जगाओ ,भारत बचाओ महाअभियान !!
*वह हिन्द का पानी जिन्दा है ,वह हिन्दुस्तानी जिन्दा है !अंग्रेजों का जानी दुश्मन ,वह सुभाष सेनानी जिन्दा है !! *
मत डरो संत से यह मुकुट नहीं मांगेगा ,धन के निमित्त धर्म नहीं त्यागेगा !
तुम सोओगे तो भी यह ऋषि जागेगा ,छिड़ गया युद्ध तो बम के गोले दागेगा !!
युग परिवर्तक महान संत सम्राट"सुभाष" की भारत की जनता से अपील..........
प्यारे देश वासियों , सादर जयहिन्द !
पिछले 68 वर्षों से भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम के महानायक एवं ब्रिटिश साम्राज्यवाद के कट्टर दुश्मन क्रांतिवीर नेताजी सुभाष चन्द्र बोस के जीवन के बारे में रहस्य बना हुआ है तथा हमारा देश आज भी गुलाम बना हुआ है !आप सभी देशभक्त जनता निम्न बातों पर विचार करें :-
(क ) १५ अगस्त १९४७ को हमारे देश को पूर्ण आजादी नहीं बल्कि अंग्रेजों की दत्तक -पुत्र भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी ने ९११ समझौतों के तहत ब्रिटेन से मात्र सत्ता का हस्तांतरण किया ,जिसके तहत देश को बाँटकर देश का कत्ल करके लगभग ४० लाख लोगों को मौत के घाट उतार दिया !अंग्रेजों की देन वहीं "गवर्नमेन्ट ऑफ़ इण्डिया "की सरकार आज भी शासन कर रही है ! ९११ समझौतों की कुछ अन्य शर्तें निम्न हैं :- १- नेताजी सुभाषचन्द्र बोस को जिन्दा या मुर्दा जब कभी मिल जायेंगें ब्रिटिश गवर्नमेंट के हवाले किया जायेगा ! २ - नेताजी सुभाषचंद्र बोस के उपर आजीवन अंतर्राष्ट्रीय युद्ध अपराधी का मुकदमा चलाया जायेगा ,जो आज भी न्युरेनवर्ग न्यायालय ,अमेरिका में चल रहा है ! ३ - भारत आज लगभग १० अरब रूपये प्रतिवर्ष बतौर पेंशन तथा लगभग १०,००० टन गोमांस ब्रिटेन को भेजता है ! ४ - भारत ब्रिटिश गवर्नमेंट द्वारा दिए गये संविधान के द्वारा शासित होगा तथा भारत की जनता ब्रिटेन की प्रजा होगी ! (ख ) साथियों भारत के वर्तमान नेताओं ने अपने विदेशी खातों में कुन्तल के कुन्तल सोना ,चांदी ,हीरा व नगदी अपने नाम से जमा किया हुआ है ,जबकि देश का प्रत्येक नागरिक कई हजार रूपये विदेशी कर्ज से दबा हुआ है ! (ग ) साथियों आजीवन अविवाहित योगिराज नेताजी सुभाषचन्द्र बोस आज भी जीवित हैं व पूर्ण स्वस्थ हैं ! संत वेश में हैं तथा सम्पूर्ण विश्व की व्यवस्था परिवर्तन ,पूर्ण स्वतन्त्रता व भारतवर्ष को पूर्ण अखण्ड बनाने के कार्यों में लगे हुए हैं और बहुत शीघ्र ही भारतवर्ष में प्रकट होंगे !एक सुनियोजित योजना के तहत "नेताजी "को बचाने के लिए विमान दुर्घटना की कहानी गढ़ी गई थी,जिसको कांग्रेस ने सत्य साबित करने का असफल प्रयास किया ! आज भी "नेताजी " को न आने देने के लिए सरकार तरह -तरह के षणयन्त्र रच रही है ! वर्तमान प्रधानमन्त्री ,राष्ट्रपति सहित सभी प्रमुख नेताओं को उपरोक्त बात की जानकारी है ,लेकिन कुर्सी जाने के भय से कोई भी नेता , "नेताजी सुभाषचन्द्र बोस "का साथ नहीं दे रहा है !
अपनों ने ही लूटा ,गैरों में कहाँ दम था !
किस्ती तो वहीं डूबी ,पानी जहाँ कम था !!
आवाहन
आज आवश्यकता इस बात की है कि हम सब भविष्य से खिलवाड़ न करके जाति ,धर्म व निजी स्वार्थों से उपर उठकर एक बार समस्त भारतवासी सत्यवादिता ,नैतिकता ,पौरुष तथा त्याग ,सेवा भाव के साथ खड़ा हों और असली मंत्र सत्यओम !वंदेमातरम् !! जयहिंद !!! के अनुसार आगे बढ़ें ! आज पुनः देश गुलामी के कगार पर खड़ा होकर आप सभी देशवासियों से बलिदान मांग रहा है ! पूर्ण स्वतन्त्रता का मूल्य सभी को चुकाना होगा !जब तक भारत को पूर्ण आजादी नहीं मिल जाती ,तब तक चैन से नहीं बैठेंगे ! इस पूर्ण आजादी के लिए तुम सभी मेरा साथ दो और मै तुम्हें अमन -चैन का अखण्ड भारत दूंगा ! इस भ्रष्ट व्यवस्था का अन्त और नई शासन व्यवस्था के सूत्रपात के लिए भारतीय सुभाष सेना का साथ दें !
देश के अंदर जहाँ कहीं भी कार्यक्रम की सूचना मिले आप उस कार्यक्रम में पहुंचकर जानकारी हासिल करें !
!! जयहिन्द -जय सुभाष, है हिन्द ,हैं सुभाष !!
निवेदक :- भारतीय सुभाष सेना ,भारत !
सम्पर्क नं :-
यदि आप देशभक्त हैं तो सम्पर्क करें निम्न नं पर- 8953845073, 8858814545
ReplyDeleteThe people say forget what happens in past....but my question ....is it possible to forget Rama, Krishna,our ancestors... If not then we must know the facts ...due to these reason our Bharat I won't say India..because it dominant of the English but Bharat not...due to subhash sir we feel good but it can be best when we know the each and every facts related to best and worst person..who destroy our country and right now we can't develop than other country.....I like subhash sir...and he is in our heart....may contact 9478763477
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