जम्मू। आतंकवाद के चलते अपने देश में ही पिछले 21 सालों से कश्मीरी पंडित विस्थापितों का जीवन व्यतीत कर रहे है। कश्मीरी पंडित विस्थापित संगठनों की माने तो विस्थापित होने के बाद कश्मीरी पंडित विस्थापित देश के विभिन्न हिस्सों में विस्थापन की जिंदगी व्यतीत कर रहे है। एपेक्स कमेटी में प्रस्ताव रखा गया कि जो विस्थापित को अपना मकान बनाने के लिए 20 लाख रुपये दिए जाएंगे। इनकी कुल आबादी मौजूदा समय में करीब पांच लाख बताई जा रही है। राजस्वमंत्री रमन भल्ला का कहना है कि सरकार विस्थापित पंडितों की वापसी को लेकर प्रतिबद्घ है। सम्मानपूर्वक वापसी को लेकर सरकार ने मसौदा भी तैयार किया है। केंद्र सरकार खासतौर पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और यूपीए चेयरपर्सन सोनिया गांधी स्वयं विस्थापितों की वापसी की योजना की निगरानी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने विस्थापित बेरोजगारों को सरकारी रोजगार भी दिया है।
कश्मीरी पंडित विस्थापितों के संगठन पनुन कश्मीर के प्रधान अश्विनी कुमार चुरंगू का कहना है कि वर्ष 1989-90 में इस्लामिक आतंकवादियों ने कश्मीरी पंडित विस्थापितों को निशाना बनाना शुरू किया। 13 सितंबर 1989 को कश्मीरी पंडितों के प्रमुख नेता टीका लाल टपलू को उनके घर के बाहर ही गोलियों से छननी कर दिया गया। जज नीलकांथ गंजू और प्रेम नाथ भट्ट का भी यही हश्र हुआ। कुल मिलाकर एक हजार कश्मीरी पंडितों को मार दिया गया। इसके बाद कश्मीरी पंडितों को घाटी छोड़कर आना पड़ा। उनका कहना है कि घाटी में हालात अब भी ठीक नही है। कश्मीरी पंडितों का मसला राजनीतिक मसला है। जब तक उन्हें घाटी में अलग होमलैंड और केन्द्र शासित प्रदेश का दर्जा नही दिया जाता तक तक घाटी लौटना संभव नही है।
सरकार रोजगार को वापिस लौटने के साथ जोड़कर देख रही है जोकि सही नही है
कश्मीरी पंडित विस्थापितों के संगठन पनुन कश्मीर के प्रधान अश्विनी कुमार चुरंगू का कहना है कि वर्ष 1989-90 में इस्लामिक आतंकवादियों ने कश्मीरी पंडित विस्थापितों को निशाना बनाना शुरू किया। 13 सितंबर 1989 को कश्मीरी पंडितों के प्रमुख नेता टीका लाल टपलू को उनके घर के बाहर ही गोलियों से छननी कर दिया गया। जज नीलकांथ गंजू और प्रेम नाथ भट्ट का भी यही हश्र हुआ। कुल मिलाकर एक हजार कश्मीरी पंडितों को मार दिया गया। इसके बाद कश्मीरी पंडितों को घाटी छोड़कर आना पड़ा। उनका कहना है कि घाटी में हालात अब भी ठीक नही है। कश्मीरी पंडितों का मसला राजनीतिक मसला है। जब तक उन्हें घाटी में अलग होमलैंड और केन्द्र शासित प्रदेश का दर्जा नही दिया जाता तक तक घाटी लौटना संभव नही है।
सरकार रोजगार को वापिस लौटने के साथ जोड़कर देख रही है जोकि सही नही है
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